पहले–पहले प्यार का ,अजब सा इज़हार हुआ,
आंखों आंखों में, न जाने कब इकरार हुआ।
आंखों से दिल तक रास्ता ,पता न चला कब पार हुआ,
तू ही मेरा ख़्वाब बन बैठा, और एक दिन साकार हुआ।
“देखा एक ख़्वाब”, तुझे अपनी सुनहरी धूप बनाने की ,
कच्चीउम्र में सच्ची सी, आशा थी तेरे दिल में बस जाने की।
तू ही प्रश्न तू ही उत्तर , तू ही हर कहानी का सार हुआ,
तू ही मेरा ख्वाबू बन बैठा ,और एक दिन साकार हुआ।
बालीउमर के उस प्रेम का, किस्मत ने कराया पाणिग्रहण,
प्रीत की डोर से बंध गए, समक्ष अग्नि के हुआ गठबंधन।
अनमोल तू तेरा साथ अनमोल, तू ही जीवन का आधार हुआ,
तू ही मेरा ख़्वाब बन बैठा ,और एक दिन साकार हुआ।