गणतंत्र दिवस कविता
आज सुबह कुछ अलग-सी लगी,हवा में आज़ादी की खुशबू जगी।हर गली, हर चौक, हर पहचान,तिरंगे में सजा मेरा हिंदुस्तान। काग़ज़
Read Moreआज सुबह कुछ अलग-सी लगी,हवा में आज़ादी की खुशबू जगी।हर गली, हर चौक, हर पहचान,तिरंगे में सजा मेरा हिंदुस्तान। काग़ज़
Read Moreपीली-पीली धूप खिली,धरती ने ली अंगड़ाई।ठंडी हवा अब मुस्काई,वसंत ने दस्तक दी आई। सरसों हँसी खेतों में,फूलों ने रंग बिखेरे।हर
Read Moreहिमालय की गोद से निकली,एक तेज़ उजली सी वाणी थी,न भय था उसमें, न झिझक कोई,बस सत्य की गहरी कहानी
Read More1.ज़िंदगी ने सिखाया है एक ही सबक बार-बार,हार वही मानता है, जो रुक जाए बीच मझधार। 2.थक कर बैठ जाना
Read Moreपहले–पहले प्यार का ,अजब सा इज़हार हुआ,आंखों आंखों में, न जाने कब इकरार हुआ। आंखों से दिल तक रास्ता ,पता
Read Moreतेरी हंसी हो जैसे फूलों की खुशबू,तेरी जिंदगी में हो हर ख्वाब पूरा,जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं,तू सदा रहे खुश,
Read More1.नया साल आया है, तो सोचा पुरानी थकान को दरवाज़े पर ही छोड़ दूँ,हर परेशानी को अलविदा कहकर अपने सपनों
Read Moreमैंने देखा था एक ख्वाब,जब मेरा अपना घर होगा,तो पक्का नहीं…एक कच्चा-सा प्यारा घर होगा । जिसकी छत पर छप्पर
Read Moreतोड़ पुरानी जंजीरों को आज नया इतिहास लिखें,गर्म लहू की धाराओं से राष्ट्रभूमि का श्रृंगार करें ।मिट्टी से उपजे मिट्टी
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