“राम से राष्ट्र” — आस्था, संस्कृति और राष्ट्र चेतना का काव्य उत्सव
भारत की आध्यात्मिक चेतना, सनातन संस्कृति और राष्ट्रप्रेम को शब्दों में पिरोती हुई काव्य-कृति “राम से राष्ट्र” आज साहित्य प्रेमियों
Read Moreभारत की आध्यात्मिक चेतना, सनातन संस्कृति और राष्ट्रप्रेम को शब्दों में पिरोती हुई काव्य-कृति “राम से राष्ट्र” आज साहित्य प्रेमियों
Read Moreबावनी इमली हत्याकांड आकर बच्ची ने कहा, माँ मुझको बतलाओ ।वो जो इमली का तरु ,क्यों न झूला पाओ ।क्यों
Read Moreजय जय जय गणपति गणनायक ।बुद्धि विवेक के तुम हो दायक । गज आनन शोभा अति प्यारी,मात-पिता प्रति भक्ति न्यारी
Read Moreकालिमा का चक्र खुद बा खुद मिटेगा ,साथ हम दोनों का काम कुछ यूँ करेगा । दो दिलों का प्यार
Read Moreक्या खूब लुभाते मन को सुहाते हो ।पावस के राजा तुम सावन बन आते हो। कारे कारे बदरा जब घुमड़-
Read Moreतुम्हारा साथ जब होता , ज़िंदगी महकने लगती । तुम्हारा साथ जब होता, ज़िंदगी चहकने लगती। आसमां छूने लगती हूँ
Read Moreपीड़ा की पीड़ा क्या होती,क्या जानें पीड़ा के दाता ?वे तो बस वो ही करते है ,जो उनके मन को
Read Moreवृक्ष न होगा तो क्या होगा? कौन प्रदूषण दूर करेगा? कौन हमें छाया फल देगा? कहाँ छिपेगी प्यारी कोयल? तोता
Read More