आज सुबह कुछ अलग-सी लगी,
हवा में आज़ादी की खुशबू जगी।
हर गली, हर चौक, हर पहचान,
तिरंगे में सजा मेरा हिंदुस्तान।
काग़ज़ नहीं, ये संकल्प बना,
संविधान से हर सपना पला।
न्याय की राह, समानता की डोर,
बंधे हुए हैं हम सब एक छोर।
किसान की मेहनत, सैनिक की शान,
शिक्षक का विश्वास, मजदूर की जान।
इन सब से मिलकर देश बना,
हर दिल में भारत बोल उठा।
तिरंगा जब ऊँचा लहराता है,
हर सीना गर्व से भर जाता है।
न भाषा अलग, न जात महान,
भारत है जब इंसान-इंसान।
गणतंत्र केवल दिन नहीं,
ये रोज़ निभाने की कहानी कहीं।
हक़ से पहले कर्तव्य रखें,
तभी देश के सपने सच्चे दिखें।
आओ मिलकर ये वचन निभाएँ,
भारत को हर दिन बेहतर बनाएँ।
दिल में रखकर देश का मान,
मनाएँ गणतंत्र — हर पल, हर स्थान।