पीली-पीली धूप खिली,
धरती ने ली अंगड़ाई।
ठंडी हवा अब मुस्काई,
वसंत ने दस्तक दी आई।
सरसों हँसी खेतों में,
फूलों ने रंग बिखेरे।
हर कोना गुनगुनाया,
सपनों ने पंख पसारे।
वीणा की मधुर तान संग,
आई माँ सरस्वती।
ज्ञान, कला और बुद्धि से,
भर दे जीवन की थाती।
टूटी शीत की चुप्पी अब,
मन में जगी तरंग।
हर दिल ने यह मान लिया,
आया खुशियों का रंग।
वसंत पंचमी सिखलाए,
हर दिन नया सवेरा।
सीखते रहें, बढ़ते रहें,
यही है जीवन का फेरा।